Wednesday, January 27, 2010

एक परिंदा देखा मैंने

एक परिंदा देखा मैंने
कुछ सहमा कुछ घबराया था वो
न जाने कौन सा डर था उसको
मन में उसके समाया था जो

जा कर थोडा नज़दीक मैंने
हलके से छू लिए उसे
मेरी छुवन में शायद उसने
प्यार की गर्मी महसूस की थी

तुरंत लिपट गया वो मुझसे
फूट फूट के रोने लगा
बड़े इत्मीनान से मैंने उससे बैठाया
और पानी पिलाया

समय गुजरा ...बाते शुरू हुई ..और परिंदे ने कहा

मैं हिन्दुस्तान हूँ

3 comments:

Rachana said...

Kya baat hai!! Gd one sirjee...:)

Arohiii said...

gudone bro...............................I like it.............

Dankiya said...

bahut khoobbkeep it up..!!